Saturday, February 18, 2012

तुम न आयी - डॉ. कुमार विश्वास

 तुम अगर नहीं आयी... गीत गा ना पाऊंगा..
सांस साथ छोड़ेगी सुर सजा ना पाऊंगा..
तान भावना की है.. शब्द शब्द दर्पण है..
बांसुरी चली आओ, होंठ का निमंत्रण है..

तुम बिना हथेली की हर लकीर प्यासी है,
तीर पार कान्हा से दूर राधिका सी है,
दूरियां समझती हैं दर्द कैसे सहना है,
आँख लाख चाहे पर होंठ को ना कहना है..
औषधि चली आओ.. चोट का निमंत्रण है..
बांसुरी चली आओ होंठ का निमंत्रण है...

तुम अलग हुई मुझसे सांस की खताओं से,
भूख की दलीलों से, वक़्त की सजाओं ने
रात की उदासी को आंसुओं ने झेला है,
कुछ गलत न कर बैठे, मन बहुत अकेला है,
कंचन कसौटी की खोट न निमंत्रण है,
बांसुरी चली आओ.. होंठ का निमंत्रण है...

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