एक दिन तने ने भी कहा था ,
जड़? जड़ तो जड़ ही है,
जीवन से सदा डरी रही है,
और यही है उसका सारा इतिहास,
की ज़मीन में मुंह गडाए पड़ी रही है,
लेकिन मैं ज़मीन से ऊपर उठा,
बहार निकला, बढ़ा हूँ, मजबूत बना हूँ|
इसी से तो तना हूँ
एक दिन डालों ने भी कहा था
तना? किस बात पर है तना?
जहाँ बिठाल दिया गया था,
वहीँ पर है बना |
प्रगतिशील जगती में तिल भर नहीं डोला है
खाया है, मोट्य है, सहलाया चोला है
वहीँ पर है बना |
प्रगतिशील जगती में तिल भर नहीं डोला है
खाया है, मोट्य है, सहलाया चोला है
लेकिन हम तने से फूटी,
दिशा दिशा में गयी,
ऊपर उठी, नीचे आयी,
हर हवा के लिए डोल बनी, लहरायी |
इसी से तो डाल कहलायीं |
दिशा दिशा में गयी,
ऊपर उठी, नीचे आयी,
हर हवा के लिए डोल बनी, लहरायी |
इसी से तो डाल कहलायीं |
एक दिन पत्तियों ने भी कहा था-
डाल? डाल में क्या है कमाल?
मन वोह झूमी, झुकी , डोली है,
ध्वनिप्रधान दुनिया में
डाल? डाल में क्या है कमाल?
मन वोह झूमी, झुकी , डोली है,
ध्वनिप्रधान दुनिया में
एक शब्द भी वो कभी बोली है?
लेकिन हम हर-हर स्वर करती हैं...
मरमर स्वर मर्म भरा भरती हैं |
नूतन हर वर्ष हुई,
पतझर में झर,
बहार फूट फिर छाहरती हैं ...
विथित चित्त पंथी का शाप ताप हरती हैं |
मरमर स्वर मर्म भरा भरती हैं |
नूतन हर वर्ष हुई,
पतझर में झर,
बहार फूट फिर छाहरती हैं ...
विथित चित्त पंथी का शाप ताप हरती हैं |
एक दिन फूलों ने भी कहा था -
पत्तियां? पत्तियों ने क्या किया?
संख्या के बल पर बस डालों को छाप दिया |
डालों के बल पर ही चल चपल रही हैं,
हवाओं के बल पर ही मचल रही हैं
पत्तियां? पत्तियों ने क्या किया?
संख्या के बल पर बस डालों को छाप दिया |
डालों के बल पर ही चल चपल रही हैं,
हवाओं के बल पर ही मचल रही हैं
लेकिन हम अपने से खुले, खिले, फूले हैं
रंग लिए, रस लिए, पराग लिए,
भ्रमरों ने आकर हमारे गुण गाये हैं ,
हम पर बौराए हैं |
रंग लिए, रस लिए, पराग लिए,
भ्रमरों ने आकर हमारे गुण गाये हैं ,
हम पर बौराए हैं |
सब की सुन पायी है ,
जड़ मुस्कायी है |
जड़ मुस्कायी है |
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