Saturday, February 18, 2012

कोई दीवाना कहता है - डॉ. कुमार विश्वास

कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ तू मुझसे दूर कैसी है
ये तेरा दिल समझता है, ये मेरा दिल समझता है

के मोहब्बत एक एहसासों की पवन सी कहानी है
कभी कबीरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है
यहाँ सब लोग कहते हैं मेरी आँखों में आंसू हैं 
जो तू समझे तो मोती हैं, जो न समझे तो पानी है 

मत पूछ की क्या हाल है मेरा तेरे आगे
तू देख के क्या रंग है तेरा मेरे आगे

समंदर पीर के अन्दर है लेकिन रो नहीं सकता
ये आंसू प्यार के मोती हैं इनको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो  नहीं सकता

भ्रमर कोई कुमिदिनी पर मचल बैठा तो हंगामा
हमारे दिल में कोई ख्वाब पल बैठा तो हंगामा
अभी तक डूब कर सुनते थे सब किस्सा मोहब्बत का
मैं किस्से को हकीकत में बदल बैठा तो हंगामा

कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है
मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
मैं तुझसे दूर कैसा हूँ, तू मुझसे दूर कैसी है
ये तेरा दिल समझता है , ये मेरा दिल समझता है

बहुत बिखरा बहुत टूटा थपेड़े सह नहीं पाया
हवाओं के इशारों पर मगर मैं बह नहीं पाया
अधूरा अनसुना ही रह गया ये प्यार का किस्सा
कभी तुम सुन नहीं पाए, कभी मैं कह नहीं पाया

मैं उसका हूँ वो  इस एहसास से इनकार करता है
भरी महफ़िल में भी रुसवा वो हर बार करता है
यकीं है सारी दुनिया को ख़फा है हमसे वो लेकिन
मुझे मालूम है फिर भी मुझी से प्यार करता है

मैं जब भी तेज़ चलता हूँ नज़ारे छूट जाते हैं
कोई जब रूप गढ़ता हूँ तो सांचे टूट जाते हैं
मैं रोता हूँ तो आकर लोग कन्धा थपथपाते हैं
मैं हँसता हूँ तो अक्सर लोग मुझसे रूठ जाते हैं

मत पूछ की क्या हाल है मेरा तेरे आगे
तू देख क्या रंग है तेरा मेरे आगे

समंदर पीर के अन्दर है लेकिन रो नहीं सकता
ये आंसू प्यार के मोती हैं इनको खो नहीं सकता
मेरी चाहत को दुल्हन तू बना लेना मगर सुन ले
जो मेरा हो नहीं पाया वो तेरा हो नहीं सकता....


No comments:

Post a Comment